CNT एक्ट की वजह से मिथेन ब्लॉक के लिए कुआं खोदने में होती है परेशानी, डीसी कोर्ट की सुनवाई लगती है बोझिलः ONGC

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 02/19/2018 - 17:28

हाल झारखंड सरकार के परियोजनाओं का -2

Akshay Kumar Jha

Ranchi:  जिस सीएनटी एक्ट को लेकर राज्य की राजनीति हर वक्त गर्म रहती है, उस सीएनटी एक्ट को लेकर ओएनजीसी (Oil and Natural Gas Corporation Limited) ने सरकार के सामने आपत्ति जतायी है. सरकार के सचिव केके सोन की अध्यक्षता में हो रही बैठक में पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से मंत्रालय के अधिकारियों ने सरकार को राज्य में चल रहे प्रोजेक्ट को लेकर क्या-क्या परेशानी आ रही है, उससे अवगत कराया. ओएनजीसी ने सिर्फ सीएनटी एक्ट को लेकर आपत्ति नहीं जतायी है. बल्कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को भी बड़ा मुद्दा बताया. कहा गया कि इन छोटी-छोटी चीजों की वजह से प्रोजेक्ट नहीं लग पा रहे हैं. जिससे राज्य ही नहीं बल्कि देश का नुकसान हो रहा है. ओएनजीसी धनबाद जिला के निरसा प्रखंड में कोल बेड मिथेन ब्लॉक्स पर काम कर रहा है. ओएनजीसी का कहना है कि इस साल के अंत तक धनबाद के करणपुरा प्रखंड में चार कुएं खोदने का लक्ष्य है. जिसके लिए लगातार माइंस और भू अर्जन सचिव से बात हो रही है. 

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सीएनटी एक्ट की डीसी कोर्ट की सुनवाई होती है बोझिल

ओएनजीसी का कहना है कि राज्य में कई प्रोजेक्ट लगने हैं. लेकिन सीएनटी एक्ट की वजह से काफी परेशानी होती है. सीएनटी एक्ट के मामले की सुनवाई डीसी कोर्ट में होती है. डीसी कोर्ट की सुनवाई काफी बोझिल होती है. राइट टू सर्विस की बात की जाए तो सीएनटी एक्ट के मामले को डीसी कोर्ट में तीन महीने के अंदर सुलझाया जाना है. लेकिन तीन महीने में सुनवाई पूरी नहीं होती है. ऐसे में ओएनजीसी को प्रोजेक्ट लगाने में काफी परेशानी होती है. ओएनजीसी को ग्रामीण इलाकों में मिथेन मिलती है, ग्रामीण इलाकों की ज्यादातर जमीन पर सीएनटी एक्ट लागू होता है. जमीन अधिग्रहण करने से पहले सीएनटी एक्ट के मामले को सुलझाना पड़ता है. ओएनजीसी का सरकार को कहना था कि जितनी देरी सीएनटी एक्ट की वजह से होती है. उतनी ही देर कुआं खोदने में होता है. सरकार से ओएनजीसी ने कहा है कि इस तरह के मामले को किसी और तरीके से सुलझाने पर विचार किया जाए. ताकि प्रोजेक्ट को लगाने में देरी ना है.

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सरकारी जमीन पर है लोगों का कब्जा

ओएनजीसी ने नए प्रोजेट्स लगाने में एक और परेशानी बतायी. कंपनी का कहना है कि ज्यादातर सरकारी जमीनों पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है. ऐसे में प्रोजोक्ट के लिए एप्रोच रोड (संपर्क मार्ग) बनाने में परेशानी होती है. जिन लोगों को सरकारी जमीन पर सालों से कब्जा है, वो ज्यादा परेशानी की वजह है. कंपनी ने कहा कि जिन लोगों ने 30-85 साल से सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए हुए हैं, वो जमीन देने की एवज में मुआवजे की डीमांड करते हैं. जो स्वीकारा नहीं जा सकता. यहां तक कि लोग जो जमीन की रसीद दिखाते हैं वो 2009 या 2011 की होती है. इससे पता नहीं चल पाता है कि जमीन पर फिलहाल किसका कब्जा है.

सरकार जमीन देने में करती है देरी

ओएनजीसी ने सरकार से कहा कि सरकार की तरफ से जमीन देने में काफी देर होती है. जिस सिस्टम से जमीन दी जाती है, उसमें काफी समय लग जाता है. कंपनी का कहना है कि जहां उन्हें गैस के कुएं खोदने होते हैं, पहले उस जिले से जमीन संबंधी सारी कार्यवाही करानी पड़ती है. उसके बाद फिर से कैबिनेट में पूरे मामले को लाया जाता है. कैबिनेट में फैसला होने के बाद ही जमीन उन्हें मिल पाती है. इस पूरी प्रक्रिया में काफी देर होती है. जिसका असर प्रोजेक्ट पर पड़ता है. इस बीच इलाके में जमीन को लेकर लोग विवाद करते हैं. जिससे लॉ एंड ऑर्डर प्रभावित होता है.

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