डोरंडा कोषागार मामला: तत्कालीन मुख्य सचिव की गवाही ली गयी, कहा बजट से ज्यादा खर्च हुआ

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 02/08/2018 - 19:42

Ranchi : डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी मामले में गुरुवार को सीबीआई की ओर से बिहार के पूर्व मुख्य सचिव विजय शंकर दुबे की गवाही दर्ज की गयी. सीबीआई के वरीय विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह ने बताया कि दुबे को गवाह संख्या 465 के रुप में दर्ज किया गया. दुबे ने अपने बयान में कहा कि पशुपालन घोटाला के विषय में उनकी जानकारी 22 जनवरी 1996 को हुई. महालेखाकार के मासिक सिविल एकाउंट वित्त विभाग में आने के बाद उसकी जांच करने पर ये बात सामने आया.

वर्ष 1995-96 के लिए पशुपालन विभाग को मिला था  लगभग 72 करोड़ रुपया का बजट

उन्होंने बताया कि वर्ष 1995-96 के लिए पशुपालन विभाग का बजट लगभग 72 करोड़ रुपया था. उसके विरुद्ध नवम्बर 1995 में 117 करोड़ रुपये खर्च हो चुका था. अक्टूबर 1995 तक का खर्च 95 करोड़ था. इस प्रकार यह स्पष्ट हुआ कि मात्र एक माह में 60 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च हुआ. जबकि प्रत्यालिपित खर्च 7-8 करोड़ रुपये का होना चाहिए था. इसी खर्च को देखते हुए मैंने 19 जनवरी 1996 को सभी जिलों के दंडाधिकारियों को फैक्स भेजवाया. जिसमें दोनों माह में कुल खर्च का बिल वाइज पूर्व विवरणी भेजने को कहा. अपने वित्त अपर सचिव मान सिंह को एक टीम के साथ रांची और डोरंडा कोषागार में जाकर पशुपालन विभाग को उस खर्च की जानकारी लेने को कहा. उन्होंने अधिकारियों को कहा कि जांच कर यह बताये कि किस यूनिट में कितना खर्च हुआ और वाउचर को भी जब्त करने को कहा. उन्होंने वहां जाकर फोन पर बताया कि रांची, चाईबासा, दुमका, देवघर, जमशेदपुर, भागलपुर आदि जिलों में भारी गोलमाल हुआ है. सारा बिल और आवंटन पत्र फजी निकला. चाईबासा में जांच टीम गयी तो वहां भगदड़ मच गयी. एक व्यक्ति भाग रहा था.

इसे भी पढ़ें: पलामू: झुनझूना पहाड़ के निकट पुलिस-नक्सलियों में भीषण मुठभेड़, एक नक्सली ढेर

भूसा के बोरा में रुपये भरकर छिपाया गया था

उसके घर से 30 लाख रुपये, अलमीरा से सोना-चांदी के जेवरात काफी मात्रा में मिल थे. भूसा के बोरा में रुपये भरकर छिपाया गया था. कुछ कर्मचारी बैंक से रुपये निकालकर रांची की ओर भाग रहे थे. मैंने रांची के जिला अधिकारी को खबर किया. वह गाड़ी उड़ीसा की ओर चली गयी तब समझ में आया गया कि उन जिलों में अत्यधिक मात्रा में कपटपूर्ण निकासी की गयी है. जांच अधिकारी मान सिंह कागजात लेकर पटना लौटे. उनकी रिपोर्ट की जांच की तब उन्होंने वित्त मंत्री और मुख्यमंत्री को आपराधिक मामला दर्ज करने को लिखा. इसी बीच लोक लेखा समिति से मुझे पत्र मिला कि यह मामला आप दर्ज नहीं कर सकते है. यह मेरा क्षेत्राधिकार का मामला है, आपका नहीं. इसके बाद मैं मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के आवास पर गया और कहा कि यह आपराधिक जांच का मामला है. इसके बाद लालू ने मामले की जांच का आदेश दिया. तब उन्होंने आपराधिक जांच काटकर ट्रेजरी वाइज जांच करने का निर्देश दिया.

गुरुवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार की अदालत में पेश हुए लालू

उनका बयान पूर्व में आरसी 20ए/96(चाईबासा कोषागार) की गवाही को आरसी 47 ए/96(डोरंडा कोषागार) में अपना लिया गया. फिर भी ये बाते लालू के अधिवक्ता ने प्रतिपरीक्षण में पूछा.  इसके अलावा फूलचंद्र सिंह, बेग जूलियस और धुव भगत की ओर से भी प्रतिपरीक्षण किया गया. अंत में लालू यादव ने भी महालेखाकार से संबंधित दो चार प्रश्न किया. उसमें अत्यधिक निकासी की बात महालेखाकर के द्वारा लिखी जाती थी. मामला दर्ज होने के बाद महालेखाकर ने एक स्पेशल रिपोर्ट में 1992,93,94 और 1995 की निकासी को कपटपूर्ण बताया है. इससे पूर्व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव गुरुवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार की अदालत में पेश हुए. इस मामले में पूर्व सांसद डा आरके राणा और जगदीश शर्मा सहित अन्य आरोपी भी पेश हुए. यह मामला डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है.

दुमका कोषागार में पेश हुए डॉ  मिश्रा

चारा घोटाला के दुमका कोषागार मामले में भी गुरुवार को डा जगन्नाथ मिश्रा सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह के अदालत में पेश में हुए. डॉ  मिश्रा के अधिवक्ता राकेश झा ने बताया कि दोनों मामलों में डा मिश्रा के खिलाफ अदालत की ओर से प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया था. मामले में विशेष कोर्ट में आवेदन देकर आग्रह किया गया गया था कि डॉ  मिश्रा चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में न्यायिक हिरासत में है. इस मामले में भी उन्हें प्रोड्यूज किया जाना चाहिए. जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. गौरतलब है कि चारा घोटाला के चाईबासा कोषागार मामले में उन्हें 24 जनवरी को दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष की सजा सुनायी गयी थी. फैसले के दिन डा मिश्रा के उपस्थित नहीं होने पर उनके खिलाफ वारंट जारी  किया गया था. डॉ  मिश्रा ने 5 जनवरी को अदालत में सरेंडर किया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. जेल में उसी दिन उनके सीने में दर्द उठने पर उन्हें रिम्स में भती कराया गया था. अब भी वह रिम्स के कार्डियोलॉजी  विभाग में पुलिस कस्टडी में इलाजरत है.

चारा घोटाला के डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में गुरुवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्रा सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार की अदालत में पेश हुए.  इस मामले में अदालत ने सुबह में डॉ मिश्रा के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी किया था

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

City List of Jharkhand
loading...
Loading...

NEWSWING VIDEO PLAYLIST (YOUTUBE VIDEO CHANNEL)