रांची : संविधान, लोकतंत्र और हम विषय पर परिचर्चा, वक्ताओं ने कहा- लोकतंत्र को धराशायी करने की हो रही कोशिश

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 01/25/2018 - 20:52

Ranchi : साहित्यकार रवि भूषण ने कहा कि देश का माहौल हमें कई बातों की ओर ध्यान दिलाता है. मौजूदा माहौल में लोकतंत्र के स्तंभ को धाराशायी करने की कोशिश की जा रही है. वे गुरुवार को हिंदपीढ़ी के मंथन हॉल में "संविधान, लोकतंत्र और हम" विषय पर आयोजित परिचर्चा में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश आजाद भारत से ही होती आई है, जो इस समय बहुत तेज है. विधायिका, कार्यपालिका के बाद अब न्यायपालिका पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दिपक मिश्रा पर सुप्रीम कोर्ट के चार जजों के द्वारा लगाए आरोपों का भी जिक्र किया. कहा कि ये लोकतंत्र की रक्षा के लिए अंदर से निकली हुई आवाज थी.

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सांप्रदायिक घटनाओं का बढ़ना गंभीर समस्या

रवि भूषण ने परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि सविधान 'हम' शब्द से शुरु होता है. हम यानी हिंदू, मुस्लिम, सीख, ईसाई, गरीब, अमीर, पूंजीपति और भिखारी, सबका इस देश पर समान अधिकार है. इस शब्द का महत्व बहुत बड़ा है, जो हमें भेद-विभेद से ऊपर रखता है. लेकिन आज धर्म-जाति के नाम पर सांप्रदायिक घटनायें बढ़ती ही जा रही हैं. हमलोगों के समक्ष यह गंभीर समास्या है. परिचर्चा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने कहा कि अल्पसंख्यकों,  दलितों और आदिवासियों के साथ राज्य में हो रहे व्यवहार घोर निंदनीय हैं. इसके खिलाफ सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एक होकर लड़ने की जरुरत है. इससे पहले समाजिक कार्यकर्ता नदीम खान ने एक नोट पढ़ा, जिसमें झारखंड में पिछले तीन साल में हुए सांप्रदायिक घटनाओं, भूख से मरे लोगों और अन्य समस्याओं का जिक्र किया गया. कार्यक्रम का आयोजन ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम झारखंड और आवामी इंसाफ मंच ने संयुक्त रुप से किया. मौके पर महादेव टोप्पो, सुधीर पाल, जेवियर कजूर, सुदामा खलको, बशीर अहमद, एके रशीदी, आबदीन, इनामुल हक, आदि मौजूद थे.

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