दारूल उलूम देवबंद का नया फतवा, बैंक की नौकरी करने वाले घरों में रिश्ता करने से करें परहेज

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 01/04/2018 - 13:57

Lucknow : देश के प्रमुख इस्लामी शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने अपने एक फतवे में बैंक की नौकरी से चलने वाले घरों से शादी का रिश्ता जोड़ने से परहेज करने को कहा है. दारुल उलूम के फतवा विभाग दारुल इफ्ताने बुधवार को यह फतवा एक व्यक्ति द्वारा पूछे गये सवाल पर दिया है. उस शख्स ने पूछा था कि उसकी शादी के लिये कुछ ऐसे घरों से रिश्ते आये हैं, जहां लड़की के पिता बैंक में नौकरी करते हैं. चूंकि बैंकिंग तंत्र पूरी तरह से सूद (ब्याज) पर आधारित है, जो कि इस्लाम में हराम है. इस स्थिति में क्या ऐसे घर में शादी करना इस्लामी नजरिये से दुरुस्त होगा?

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किसी पवित्र परिवार में ढूंढे रिश्ता

इस पर दिये गये फतवे में कहा गया कि ऐसे परिवार में शादी से परहेज किया जाए. हराम दौलत से पले-बढ़े लोग आमतौर पर सहज प्रवृत्ति और नैतिक रूप से अच्छे नहीं होते. लिहाजा, ऐसे घरों में रिश्ते से परहेज करना चाहिये. बेहतर है कि किसी पवित्र परिवार में रिश्ता ढूंढा जाए.’’ इस्लामी कानून या शरीयत में ब्याज वसूली के लिये रकम देना और लेना शुरू से ही हराम माना जाता रहा है. इसके अलावा इस्लामी सिद्धांतों के मुताबिक हराम समझे जाने वाले कारोबारों में निवेश को भी गलत माना जाता है.

कुछ देशों में इस्लामी बैंक ब्याजमुक्त बैंकिंग के सिद्धांतों पर करते हैं काम

इस्लाम के मुताबिक धन का अपना कोई स्वाभाविक मूल्य नहीं होता, इसलिये उसे लाभ के लिये रहन पर दिया या लिया नहीं जा सकता. इसका केवल शरीयत के हिसाब से ही इस्तेमाल किया जा सकता है. दुनिया के कुछ देशों में इस्लामी बैंक ब्याजमुक्त बैंकिंग के सिद्धांतों पर काम करते हैं.

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