शिक्षण परिसरों में अशांति किसी भी तरह लाभदायक नहीं, दूर करने के लिये समस्यों के मूल में जाने की जरूरत : राम नाईक

Submitted by NEWSWING on Sat, 01/06/2018 - 11:05

Lucknow : उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने देश के विश्वविद्यालय परिसरों में अशांति की बढ़ती घटनाओं को चिंताजनक मानते हुए शुक्रवार को इनके समाधान के लिये समस्या की जड़ में जाकर काम करने की जरूरत बतायी. उन्होंने एक सवाल पर कहा कि शिक्षण परिसरों में अशांति किसी भी तरह लाभदायक नहीं होती है. जिन कारणों से यह पैदा होती है, अगर उसकी जड़ में जाकर काम किया जाए तो ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न ही नहीं होंगी. नाईक ने इलाज से एहतियात भलीइस कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि इसी मूलमंत्र पर काम करते हुए शिक्षकों और छात्रों के बीच संवाद होना चाहिये. इसमें छात्रों के संगठन के माध्यम से भी चर्चा होनी चाहिये.

अशांति शिक्षा के महौल के लिये अच्छी नहीं है

शिक्षा परिसरों में अनुशासन बनाये रखने के नजरिये से वह इसे अनुकूल मानते हैं. किसी भी कारण से शिक्षण परिसरों में जो अशांति हो रही है वह शिक्षा के माहौल के लिये अच्छी नहीं है. राज्यपाल से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं के उग्र प्रदर्शन तथा कुछ अन्य विश्वविद्यालयों में पूर्व में फैली अशांति के बारे में सवाल पूछा गया था. प्रदेश के 28 विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में अपने अनुभव साझा करने के लिये आहूत प्रेस कांफ्रेंस में नाईक ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी और स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों में हो रही गड़बड़ियों के लिये जिम्मेदार कानूनी कमी को दूर करने के लिये उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और उनकी पहल पर एक समिति बनायी गयी है. यह समिति सरकार को अब तक तीन रिपोर्ट दे चुकी है. भविष्य में और भी पहलुओं पर काम होगा जिसके बाद कानून को शैक्षिक गड़बड़ियों को दूर करने लायक बनाया जाएगा.

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शिक्षकों के खाली पदों को भरे जाने की जरूरत

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में सेवानिवृत्त शिक्षकों के जरिये शिक्षण कार्य कराये जाने के बारे में एक सवाल पर कहा कि अवकाशप्राप्त शिक्षकों की उपलब्धता तुलनात्मक रूप से बेहतर होती है. हालांकि राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की बहुत कमी है, लिहाजा खाली पदों को भरे जाने की भी जरूरत है. नाईक ने उच्च शिक्षा में लड़कियों की करीब 51 प्रतिशत भागीदारी होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस सिलसिले का बीज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में सर्वशिक्षा अभियानके रूप में बोया गया था और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चलाये बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओअभियान से वह और पल्लवित हुआ है.

राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने जब वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का कार्यभार सम्भाला था तो उन्होंने दो प्राथमिकताएं बतायी थीं. पहला, शिक्षण सत्र नियमित कराना और दूसरा, दीक्षान्त समारोहों को समय से आयोजित कराना. इन दोनों ही कार्यों में खासी सफलता मिल चुकी है. नाईक ने माना कि वह राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं, इसीलिये उसकी बेहतरी के प्रयास किये जा रहे हैं. उन्होंने राज्य सरकार को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और अनुसंधान कार्य में उत्तरोत्तर वृद्धि के लिये कुछ सुझाव भी दिये.

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