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नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही वित्तीय समावेश के मौजूदा अभियानों को रफ्तार देने के ठोस कदम उठा सकते हैं। प्रधानमंत्री की ओर से वित्तीय समावेश की बड़ी योजना के खुलासे की उम्मीद है। माना...

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पटना: अब इन्‍हें चोर कहें या व्हिसिल ब्‍लोअर! दरअसल, मामला ही कुछ ऐसा है...

नई दिल्लीा: देश को कम मानसून की परेशानी से छुटकारा मिल जाएगा। मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड...

वॉशिंगटन: अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में न्यायपालिका सहित हर स्त...

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रियो डी जेनिरियो: जर्मनी चौथी बार विश्व कप फुटबाल का बादशाह बन गया। उसने इतिहास दोहराया भी और नया...


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रांची: न्यूज विंग साप्ताहिक का नया अंक बाजार में आ गया है। इस अंक की कवर स्टोरी है, हेमन्त सरकार पर...

देख अपनी ओर  (पंकज श्रीवास्तव की एक और पुस्तक ...पुस्तक का अंश..)

.. अपनी ओर देखने की फुर्सत किसे है? दुनियादारी की व्यस्तताओं में सब रचे-पचे है। सब इस नशे के आदी हो चुके है। मौका ही नहीं मिलता की कभी अपनी ओर भी देखें। अपनी ओर देखने वाले बिरले हैं। पांचों खिड़कियों से बाहर देखते-देखते बाहर की दुनिया स्वाभाविक लगने लगता है। ताउम्र बाहर ही खिचे रहते है। इस बेहोशी में उम्र तमाम हो जाती है। गजब की नशीली है यह दुनियादारी। अपनी ओर देखने का होश शायद ही किसी को हो पाता है। अपने स्वरूप की झलक कभी कभार हर इन्सान को मिला करती है परन्तु कोर्इ बिरला ही इसे समझ पाता है और समझ कर उसमें टिके रह पाता है।

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